सुपौल में भारत–नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की 45वीं वाहिनी, बीरपुर ने मानव तस्करी के एक गंभीर प्रयास को विफल करते हुए 8 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। साथ ही इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई सीमा चौकी भीमनगर द्वारा चेक पोस्ट भीमनगर पर नियमित जांच अभियान के दौरान की गई। 45वीं वाहिनी के कमांडेंट गौरव सिंह ने बताया कि भारत–नेपाल सीमा क्षेत्र में मानव तस्करी की आशंका को देखते हुए सभी चेक पोस्टों पर लगातार सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। 2 युवकों को नेपाल जाते रोका इसी क्रम में ड्यूटी के दौरान जवानों ने 8 नाबालिग बच्चों और 2 युवकों को संदिग्ध स्थिति में भारत से नेपाल जाते हुए रोका। पूछताछ के दौरान दोनों युवक बच्चों से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके और बार-बार अपने बयान बदलते रहे, जिससे संदेह और गहरा गया। जांच में सामने आया कि सभी बच्चे नाबालिग हैं और उन्हें बहला-फुसलाकर उनके घरों से लाया गया था। बच्चों के परिवारों को यह कहकर गुमराह किया गया था कि उन्हें घूमने के लिए ले जाया जा रहा है, जबकि असल में उनसे बाल श्रम कराया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नेपाल के सुनसरी जिले के निवासी सुंदर सादा (32) और उमेश ऋषिदेव (38) के रूप में हुई है। बच्चों को नेपाल से लाए थे भारत प्रारंभिक जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दोनों तस्कर बच्चों को नेपाल से भारत लाए थे, जहां उनसे अवैध रूप से काम कराया गया और फिर वापस नेपाल ले जाया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए SSB की मानव तस्करी रोधी इकाई की मौजूदगी में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को आगे की कार्रवाई के लिए नेपाल प्रहरी भानटावारी, जिला सुनसरी को सौंप दिया गया है। SSB ने स्पष्ट किया है कि सीमा क्षेत्र में मानव तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
भारत-नेपाल बॉर्डर पर 8 नाबालिगों को मानव तस्करी से बचाया:सुपौल में SSB ने 2 आरोपी को किया अरेस्ट, अवैध रूप से करवा रहे थे काम
सुपौल में भारत–नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की 45वीं वाहिनी, बीरपुर ने मानव तस्करी के एक गंभीर प्रयास को विफल करते हुए 8 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। साथ ही इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई सीमा चौकी भीमनगर द्वारा चेक पोस्ट भीमनगर पर नियमित जांच अभियान के दौरान की गई। 45वीं वाहिनी के कमांडेंट गौरव सिंह ने बताया कि भारत–नेपाल सीमा क्षेत्र में मानव तस्करी की आशंका को देखते हुए सभी चेक पोस्टों पर लगातार सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। 2 युवकों को नेपाल जाते रोका इसी क्रम में ड्यूटी के दौरान जवानों ने 8 नाबालिग बच्चों और 2 युवकों को संदिग्ध स्थिति में भारत से नेपाल जाते हुए रोका। पूछताछ के दौरान दोनों युवक बच्चों से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके और बार-बार अपने बयान बदलते रहे, जिससे संदेह और गहरा गया। जांच में सामने आया कि सभी बच्चे नाबालिग हैं और उन्हें बहला-फुसलाकर उनके घरों से लाया गया था। बच्चों के परिवारों को यह कहकर गुमराह किया गया था कि उन्हें घूमने के लिए ले जाया जा रहा है, जबकि असल में उनसे बाल श्रम कराया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नेपाल के सुनसरी जिले के निवासी सुंदर सादा (32) और उमेश ऋषिदेव (38) के रूप में हुई है। बच्चों को नेपाल से लाए थे भारत प्रारंभिक जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दोनों तस्कर बच्चों को नेपाल से भारत लाए थे, जहां उनसे अवैध रूप से काम कराया गया और फिर वापस नेपाल ले जाया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए SSB की मानव तस्करी रोधी इकाई की मौजूदगी में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को आगे की कार्रवाई के लिए नेपाल प्रहरी भानटावारी, जिला सुनसरी को सौंप दिया गया है। SSB ने स्पष्ट किया है कि सीमा क्षेत्र में मानव तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

