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मधेपुरा में सोमवार को केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में किसान, खेतिहर मजदूर, निर्माण मजदूर, महिलाएं, छात्र और नौजवान संगठनों ने संयुक्त प्रदर्शन किया। राष्ट्रव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ के तहत यह प्रदर्शन किसान-मजदूरों के अधिकारों की मांग को लेकर किया गया। कला भवन परिसर से शुरू हुआ जुलूस भूपेंद्र चौक होते हुए समाहरणालय पहुंचा। यहां यह प्रदर्शन एक सभा में बदल गया, जिसकी अध्यक्षता गणेश मानव ने की। प्रदर्शनकारियों ने पंचायतों में होल्डिंग, सफाई और पानी टैक्स बंद करने की मांग की। इसके साथ ही, वाहनों पर बढ़े टैक्स और स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स समाप्त करने की भी मांग उठाई गई। संविदाकर्मियों के स्थायीकरण की भी मांग पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट रोकने और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें कम करने की भी मांग की गई। नेताओं ने सीलिंग, भूदान और बिहार सरकार की जमीन के फर्जी केवाला एवं जमाबंदी रद्द करने की अपील की। उन्होंने पर्चाधारियों को उनकी जमीन पर दखल दिलाकर जमाबंदी कायम करने की भी मांग की। सभी भूमिहीन परिवारों को बास और आवास उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग की। रसोइया, आशा, ममता, कुरियर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित सभी संविदाकर्मियों के स्थायीकरण की भी मांग की गई। केंद्र सरकार की नीतियों का किया विरोध इन कर्मियों के लिए न्यूनतम 26 हजार रुपए मासिक वेतन निर्धारित करने की मांग भी रखी गई। वक्ताओं ने मधेपुरा नगर परिषद में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने, जल निकासी और शहरी क्षेत्र में पेयजल की समुचित व्यवस्था करने की मांग की। खाद, बीज और कीटनाशक पर सब्सिडी जारी रखने, खाद की कालाबाजारी रोकने, चारों लेबर कोड रद्द करने, कोसी प्राधिकार कानून बहाल करने और बिजली के निजीकरण एवं स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने की मांग भी शामिल थी। महंगाई पर रोक लगाने की मांग की सीपीएम राज्य सचिव मंडल की सदस्य रामपरी ने केंद्र सरकार की नीतियों को किसान और मजदूर विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि ‘अच्छे दिन’ के नाम पर किसानों और मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे हैं। रामपरी ने भूमिहीन परिवारों को सीलिंग की जमीन से हटाने के प्रयासों का विरोध किया। महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण, युवाओं को रोजगार, मनरेगा को मजबूत करने तथा महंगाई पर रोक लगाने की मांग की।
