भास्कर न्यूज|लोहरदगा लोहरदगा में लोहरदगा चेंबर ऑफ कॉमर्स और विहिप से जुड़े रितेश कुमार ने हिंडाल्को इंडस्ट्रीज पर सामाजिक दायित्व और स्थानीय विकास की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कंपनी करीब 60 वर्षों से क्षेत्र में बॉक्साइट का उत्खनन और ढुलाई कर रही है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण, और रोजगार के मामले में ठोस योगदान नहीं दिखता। रितेश कुमार के अनुसार बॉक्साइट कारोबार से कंपनी को सालाना लगभग 600 करोड़ रुपए की सकल आय होती है। उनका दावा है कि इस आय का 2 प्रतिशत भी यदि लोहरदगा के विकास और पर्यावरण संतुलन पर खर्च होता, तो जिले की पहचान औद्योगिक शहरों की तरह बन सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने रेनूकोट का विकास बॉक्साइट से होने वाली कमाई से किया। जबकि, लोहरदगा में स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार देने की व्यवस्था कमजोर रही है। उनके मुताबिक ढुलाई क्षेत्र में कुछ हद तक स्थानीय भागीदारी दिखती है। हालांकि, इसमें भी चयन सीमित बताया गया है। इसे प्रभावशाली पैरवी पर निर्भर भी बताया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्टोरेज का लक्ष्य पूरा होते ही विभिन्न कारणों से ट्रकों का संचालन रोक दिया जाता है। इससे स्थानीय परिवहन व्यवसाय प्रभावित होता है। रितेश कुमार ने बॉक्साइट ढुलाई से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि लोहरदगा और गुमला क्षेत्र में ट्रकों से लगातार हादसे हो रहे हैं। इनमें बच्चों और अन्य लोगों की मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। उनके अनुसार सुरक्षित ढुलाई के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। इलाज की स्थिति में पीड़ितों को सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने उत्खनन से बने गड्ढों के भराव, पौधरोपण, और शिक्षा ढांचे में निवेश को भी अपर्याप्त बताया। उनका कहना है कि गांवों में पर्यावरणीय नुकसान बढ़ रहा है। शिक्षा व्यवस्था भी मुख्य रूप से सरकारी तंत्र पर ही निर्भर है।
