Wednesday, May 6, 2026

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विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा गंगा में गिरा:कटिहार और भागलपुर का संपर्क टूटा, आना-जाना और बिजनेस प्रभावित


विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा 3-4 मई 2026 की देर रात करीब 1:10 बजे गंगा नदी में गिर गया। कटिहार को भागलपुर से जोड़ने वाले इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से पूरे सीमांचल क्षेत्र में आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुल के पाया संख्या 133 के धंसने के कारण यह हादसा हुआ। घटना के बाद प्रशासन ने एहतियातन सेतु पर यातायात पूरी तरह से रोक दिया है। पुल की मरम्मत में कम से कम तीन महीने का समय लग सकता इस घटना के कारण भागलपुर से कटिहार, नवगछिया, पूर्णिया सहित कई जिलों का सीधा संपर्क टूट गया है। यात्रियों को अब भागलपुर पहुंचने के लिए लगभग 150 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि पुल की मरम्मत में कम से कम तीन महीने का समय लग सकता है। इस घटना का सीधा असर आम लोगों की दिनचर्या पर पड़ा है। कटिहार जिले से प्रतिदिन लगभग 5 हजार लोग भागलपुर आते-जाते थे, जिनमें व्यवसायी, छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा शामिल हैं। अब उन्हें वैकल्पिक और जोखिम भरे मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। बरारी होते हुए लंबा चक्कर लगाकर यात्रा कर रहे लोग कई यात्री मनिहारी के रास्ते नाव या अन्य साधनों से गंगा पार कर रहे हैं, जबकि कुछ नवगछिया हाई लेवल पुल के रास्ते बरारी होते हुए लंबा चक्कर लगाकर यात्रा कर रहे हैं। कटिहार अस्थायी बस पड़ाव पर यात्रियों और बस संचालकों ने बताया कि इस स्थिति ने यात्रा को महंगा और असुविधाजनक बना दिया है। इसके अलावा, भवन निर्माण सामग्री के कारोबार पर भी व्यापक असर पड़ा है। ट्रक संचालकों, जिनमें हैदर अली भी शामिल हैं, के अनुसार, गिट्टी और बालू की ढुलाई अब लंबी दूरी से करनी पड़ रही है, जिससे लागत में वृद्धि हुई है। पहले बालू का दाम लगभग 6000 रुपये प्रति सीएफटी था, जो अब 6 से 10 रुपये प्रति सीएफटी तक बढ़ गया है। सिल्क उद्योग पर भी पड़ा असर दूसरी ओर, बंगाल सीमा पर चुनावी प्रतिबंध और इस सेतु के क्षतिग्रस्त होने से परिवहन व्यवस्था और प्रभावित हुई है। भागलपुर का प्रसिद्ध सिल्क उद्योग भी इससे अछूता नहीं है। कारोबारियों का कहना है कि कटिहार और पूर्णिया के बाजार तक समय पर माल पहुंचाना मुश्किल हो गया है, जिससे व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। कुल मिलाकर, विक्रमशिला सेतु की क्षति ने क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और जनजीवन दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। प्रशासन द्वारा शीघ्र मरम्मत की उम्मीद की जा रही है, ताकि हालात सामान्य हो सकें।

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