Friday, May 22, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

3.15 crore rupees withdrawn from Bokaro Treasury in 20 months under the salary head of a sub-inspector.

रांची5 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

झारखंड में सरकारी खजाने से वेतन मद में करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बोकारो ट्रेजरी से एक पुलिस सब इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के वेतन मद में 20 माह में 3.15 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। प्रधान महालेखाकार (पीएजी) चंद्रमौली सिंह द्वारा वित्त सचिव प्रशांत कुमार को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। ट्रेजरी के निरीक्षण के बाद पीएजी ने गुरुवार को सरकार को यह रिपोर्ट भेजी है।

आमतौर पर एक पुलिस सब इंस्पेक्टर को करीब एक लाख रुपये वेतन मिलता है। लेकिन उपेंद्र सिंह के वेतन मद में मई 2024 से दिसंबर 2025 तक जो निकासी हुई, उसके अनुसार वेतन 15 लाख रुपये प्रति महीने से ज्यादा हो जाता है। खास बात यह है कि 3.15 करोड़ की निकासी पर जीपीएफ मद में सिर्फ 61,668 रुपये की कटौती की गई। वहीं आयकर और टीडीएस मद में कोई कटौती नहीं की गई है। सिस्टम में पुलिस सब इंस्पेक्टर का पे लेवल 7वें सीपीसी के लेवल-18 के बराबर दिखाया गया है, जो संभव ही नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रेजरी इंस्पेक्शन और डेटा एनालिसिस के दौरान पेरोल प्रोसेसिंग, पे एंटाइटलमेंट और वैलिडेशन में बड़े पैमाने पर कंट्रोल गैप पाए गए हैं। बोकारो के अलावा अन्य ट्रेजरी में भी कुछ मामलों में दो बार वेतन निकाले जाने की भी आशंका है। यही नहीं, एक ही अवधि का भुगतान एक से अधिक बार किया गया।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

निरीक्षण के बाद ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई बोकारो के ट्रेजरी अफसर गुलाबचंद उरांव ने इस मामले से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा- एजी ऑफिस के सीनियर अकाउंट्स अफसर ने ट्रेजरी के निरीक्षण के बाद ऐसे किसी मामले की चर्चा नहीं की। ऑफिस खुलने पर इसकी तहकीकात करेंगे।

ऐसा कोई बिल नहीं भेजा: मुख्यालय डीएसपी इस संबंध में सच जानने के लिए बोकारो एसपी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन पता चला कि वे अभी अवकाश पर हैं। निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी मुख्यालय डीएसपी अनिमेश गुप्ता ने कहा कि ऐसी कोई निकासी एसपी ऑफिस द्वारा नहीं की गई है। न ही ऐसा कोई बिल ट्रेजरी को भेजा गया है।

ट्रेजरी इंस्पेक्शन रिपोर्ट में ऐसी-ऐसी गड़बड़ियां दिखाईं

एक ही अवधि में कई बार डुप्लीकेट बिल भुगतान का शक।

एक ही अवधि के लिए कई सैलरी बिल प्रोसेस किए गए।

अलग-अलग ट्रेजरी वाउचर नंबरों से समान राशि बार-बार निकाली गई।

10.33 लाख, 10.27 लाख जैसी रकम कई बार क्लेम की गई।

20.03 लाख, 19.03 लाख जैसे बड़े भुगतान ओवरलैपिंग पीरियड में किए गए हैं।

भुगतान का यह पैटर्न डुप्लीकेशन और ओवर पेमेंट की ओर इशारा करता है।

जेड कैटेगरी शहरों में हाउस रेंट मद में 10% के बजाय 20% तक भुगतान।

डीए में भी स्वीकृत 58% से अधिक दर पर भुगतान किया गया।

बेसिक पे की गलत गणना की गई।

मेडिकल अलाउंस में अलग-अलग दरों पर भुगतान हुआ।

पीएजी ने कहा- जनवरी से मार्च तक का कर्मचारियों का डेटा साझा करें रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गड़बड़ी सिस्टम लेवल पर हुई है। पेरोल प्रोसेसिंग में वैलिडेशन की कमी पाई गई है। मास्टर डेटा की इंटीग्रिटी कमजोर है। पे एंटाइटलमेंट की गलत मैपिंग हुई है। डुप्लीकेट वाउचर रोकने का कोई प्रभावी मैकेनिज्म नहीं है। प्रधान महालेखाकार ने वित्त विभाग से कहा है कि जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक का एम्प्लॉई-वाइज डेटा नियमित रूप से साझा करें, ताकि गहराई से जांच की जा सके। इसके साथ ही पीएमयू सेल को भी निर्देश देने को कहा है, ताकि पूरे राज्य में एस्टैब्लिशमेंट खर्च की मॉनिटरिंग मजबूत हो सके।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles