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रांची विश्वविद्यालय (आरयू) के अंग्रेजी विभाग में पीएचडी कोर्स वर्क पूरा कर चुके करीब 60 शोधार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। विभाग ने पूरी पढ़ाई कराने और परीक्षा लेने के बाद अब नए पीएचडी रेगुलेशन का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं। इस फरमान से आक्रोशित शोधार्थी मंगलवार को शहीद चौक स्थित विवि मुख्यालय पहुंचे और रजिस्ट्रार डॉ. राजकुमार शर्मा को लिखित शिकायत सौंपी। शोधार्थियों की मांग है कि विवि प्रशासन मामले की जांच कर स्पष्ट करे कि जिस कोर्स वर्क के लिए उनसे शुल्क लिया गया, पढ़ाई कराई गई और परीक्षा ली गई, उसका आगे पीएचडी प्रक्रिया में क्या दर्जा होगा। स्कॉलर बोले- पैसा और समय दोनों बर्बाद नाराज शोधार्थियों का कहना है कि जब दिसंबर 2025 में पूरी प्रक्रिया हो चुकी थी और कक्षाएं चलीं, तो अब बीच रास्ते में नया नियम क्यों थोपा जा रहा है? अकादमिक नियमों की स्पष्टता पहले होनी चाहिए थी। छात्रों ने सवाल उठाया कि उनके बर्बाद हुए समय और पैसे की भरपाई कौन करेगा? उन्होंने मांग की है कि उनके कोर्स वर्क को आगे पीएचडी के लिए वैध घोषित किया जाए। 2024 में नोटिफिकेशन, 8000 रुपए भी लिए गए शोधार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय ने वर्ष 2024 में पीएचडी में एडमिशन के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके बाद करीब 60 विद्यार्थियों ने आवेदन किया। प्रत्येक विद्यार्थी ने 2,000 रुपए आवेदन शुल्क जमा किया। दिसंबर 2025 में प्रवेश प्रक्रिया पूरी हुई और विद्यार्थियों ने 6,000 रुपए एडमिशन शुल्क देकर नामांकन लिया। कोर्स वर्क की पढ़ाई पूरी हो चुकी है।
रांची विश्वविद्यालय ने दिया नए रेगुलेशन का हवाला:पीजी अंग्रेजी; कोर्स वर्क कराया, परीक्षा भी ली… अब कहा- इसका कोई फायदा नहीं
